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बारूद से नहीं, बातचीत से तय होगी नई विश्व व्यवस्था! दिल्ली ने बदला शक्ति संतुलन का व्याकरण

संपादकीय | प्रणव बजाज तीन दिन, 15 द्विपक्षीय बैठकें और उन मुलाकातों की अलग कहानी, जो किसी आधिकारि…

नेहरू के सवाल भविष्य से थे, मोदी के भाषण में उपलब्धियों का हिसाब—क्या विश्वविद्यालय की राजनीति इतनी बदल गई?

सम्पादकीय : प्रणव बजाज विश्वविद्यालय का मंच सिर्फ भाषण देने की जगह नहीं होता। वहां देश का प्रधानम…

जनता की जेब, साहब की तिजोरी

व्यंगः प्रणव बजाज नेता जी: “मैंने जनता की सेवा की है।” जनता: “जी हाँ साहब, सेवा ऐसी कि आपकी संपत्…

वोट बैंक के लिए सनातन को गाली? कांग्रेस से सीधा सवाल—अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं?

व्यंग्य | प्रणव बजाज वोट बैंक की राजनीति में अब मर्यादा की भी नीलामी होगी क्या? कांग्रेस सहित किस…

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