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डिग्रियां बड़ी, लेकिन साइबर ठगों से हार! डिजिटल अरेस्ट में डॉक्टर, इंजीनियर और रिटायर्ड अफसर सबसे बड़े शिकारThey hold significant degrees, but they're defeated by cyber criminals! Doctors, engineers, and retired officers are the biggest victims of digital arrests.

 

95% पीड़ित उच्च शिक्षित, कानून और जांच एजेंसियों का डर दिखाकर करोड़ों की ठगी; पढ़ाई नहीं, डिजिटल जागरूकता की कमी पड़ रही भारी

ग्वालियर समेत देशभर में साइबर अपराध का नया चेहरा सामने आया है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में सबसे ज्यादा शिकार वे लोग बन रहे हैं जिन्हें समाज सबसे जागरूक और शिक्षित मानता है। डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, कारोबारी और रिटायर्ड अधिकारी कानून के नाम पर रचे गए साइबर जाल में फंसकर अपनी जीवनभर की कमाई गंवा रहे हैं।


पुलिस के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट के अधिकांश मामलों में करीब 95 प्रतिशत पीड़ित उच्च शिक्षित हैं। साइबर ठग खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों से लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा लेते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ठग लोगों की शिक्षा नहीं, बल्कि उनके डर, जल्दबाजी और डिजिटल जागरूकता की कमी का फायदा उठाते हैं।

सावधानी ही बचाव है:

किसी भी वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें।

किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं दिया जाता।

संदेह होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

सवाल यही है:

क्या सिर्फ डिग्री हासिल कर लेना पर्याप्त है, या डिजिटल दौर में साइबर जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है?

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