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BRICS NSA Meet: बदलती दुनिया में BRICS ही नई उम्मीद? NSA डोभाल ने बताया क्यों बढ़ रहा है इस मंच का महत्वBRICS NSA Meet: Is BRICS the new hope in a changing world? NSA Doval explains why this forum is gaining importance.

 


वैश्विक उथल-पुथल, युद्ध और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में डोभाल बोले— पुरानी व्यवस्थाएं चुनौतियों का समाधान देने में हो रही हैं कमजोर

ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) की बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य, बढ़ते संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में BRICS देशों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।


डोभाल ने कहा कि दुनिया आज भू-राजनीतिक तनाव, क्षेत्रीय संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याओं से जूझ रही है। कई पारंपरिक वैश्विक संस्थाएं इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान देने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में BRICS वैश्विक दक्षिण (Global South) की आकांक्षाओं और हितों की मजबूत आवाज बनकर उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि BRICS केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं है, बल्कि यह विकासशील देशों को अधिक संतुलित, न्यायसंगत और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा है। डोभाल के अनुसार सदस्य देशों के बीच सहयोग, संवाद और साझा विकास की सोच वैश्विक स्थिरता को मजबूती दे सकती है।

बैठक के दौरान डोभाल ने अंतरराष्ट्रीय शांति और कूटनीतिक प्रयासों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि संवाद और कूटनीति ही जटिल विवादों के समाधान का सबसे प्रभावी रास्ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS के विस्तार और बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता ने इसे विकासशील देशों के लिए एक प्रभावशाली मंच बना दिया है। बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन के बीच भारत भी इस समूह के माध्यम से वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

BRICS में शामिल प्रमुख देश

ब्राज़ील

रूस

भारत

चीन

दक्षिण अफ्रीका

डोभाल का संदेश स्पष्ट था कि जब दुनिया नई चुनौतियों और नए शक्ति समीकरणों के दौर से गुजर रही है, तब BRICS केवल एक संगठन नहीं बल्कि वैश्विक दक्षिण की बढ़ती राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक ताकत का प्रतीक बनता जा रहा है।

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