केमिकल से पके फल आजकल बाजार में तेजी से बढ़ रहे हैं और यह सेहत के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। इसको लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों से फल पकाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अधिक मुनाफे के लालच में कुछ व्यापारी इस खतरनाक तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आने पर एसिटिलीन गैस छोड़ता है, जिसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे जहरीले तत्व हो सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा उल्टी, दस्त, पेट दर्द, सीने में जलन और सांस से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। यह रसायन शरीर के नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित करता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
पाचन तंत्र पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। ऐसे फल खाने के बाद जी मिचलाना, उल्टी और डायरिया जैसी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं, क्योंकि शरीर इन विषैले तत्वों को बाहर निकालने की कोशिश करता है। इसके विपरीत, प्राकृतिक रूप से पकने वाले फल एथिलीन गैस के जरिए धीरे-धीरे पकते हैं और उनमें पोषक तत्व पूरी तरह विकसित होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं।
केमिकल से पके फलों की पहचान भी की जा सकती है। ऐसे फल अक्सर बहुत ज्यादा चमकदार और एक जैसे रंग के होते हैं, उनमें अजीब या तेज गंध आती है और दबाने पर कहीं नरम तो कहीं सख्त महसूस होते हैं। स्वाद में भी कमी या केमिकल जैसा अहसास होता है।
बचाव के लिए जरूरी है कि फल खरीदते समय सावधानी बरती जाए, उन्हें अच्छी तरह धोया जाए और संभव हो तो मौसमी व स्थानीय फल ही चुने जाएं। नियमों के अनुसार कैल्शियम कार्बाइड का उपयोग गैरकानूनी है और ऐसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। इसलिए थोड़ी सी सतर्कता अपनाकर आप अपनी और अपने परिवार की सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं।

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