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ममता बनर्जी की हार से चौंका बांग्लादेश, सुवेंदु अधिकारी की जीत पर खुशीElection Commission tightens its grip on Bengal following violence; directs immediate action against culprits



पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी हलचल पैदा कर दी है। वहां की प्रमुख विपक्षी पार्टी के नेता अजीजुल बारी हेलाल ने परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी की हार पर हैरानी जताई, जबकि सुवेंदु अधिकारी की जीत का स्वागत किया।

हेलाल ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में और मजबूती आने की उम्मीद है। उन्होंने विशेष रूप से तीस्ता नदी के जल बंटवारे के मुद्दे पर प्रगति की संभावना जताई।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच शांति, सहयोग और आपसी भरोसे को बढ़ाना जरूरी है। बदलते हालात में संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद भी व्यक्त की गई है।

बंगाल में बीजेपी का ‘दोहरा शतक’

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. यहां पहली बार बीजेपी की सरकार बनाने जा रही है. 9 मई को नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा. बीजेपी ने बंगाल में 207 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों पर ही सिमट गई. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सीट भी नहीं बचा पाईं. भवानीपुर में उन्हें करारी शिकस्त मिली. सुवेंदु ने उन्हें 15114 वोटों से हराया.

क्या है तीस्ता जल समझौता, जिससे BAN को उम्मीद

बांग्लादेशी नेता ने कहा कि अब सुवेंदु अधिकारी के आने से तीस्ता जल समझौते का रास्ता साफ हो जाएगा. ममता इसे रोक रही थीं. दरअसल, तीस्ता जल समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच एक ऐसा समझौता है, जिसका उद्देश्य तीस्ता नदी के पानी का उचित बंटवारा करना है. दोनों देशों के बीच यह मुद्दा दशकों से चर्चा का विषय बना हुआ है. यह नदी भारत के सिक्किम राज्य के हिमालय क्षेत्र से निकलती है.

सिक्किम के बाद यह पश्चिम बंगाल से होकर बहती है और अंत में बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है. यह बांग्लादेश की चौथी सबसे बड़ी नदी है और वहां के करोड़ों लोगों की खेती और जीविका का मुख्य आधार है. 1983 में एक समझौता हुआ था जिसके तहत भारत को 39 और बांग्लादेश को 36 फीसदी पानी मिलता था, जबकि बाकी 25 फीसदी का बंटवारा तय नहीं था.

2011 में भारत सरकार और बांग्लादेश के बीच एक नई संधि होने वाली थी. इसके तहत दिसंबर से मार्च के दौरान भारत को 42.5 फीसदी और बांग्लादेश को 37.5 फीसदी पानी मिलने का प्रस्ताव था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते का विरोध किया था.

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