राजस्थान की राजधानी जयपुर में इन दिनों जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) का एक्शन मोड चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए जेडीए का 'पीला पंजा' जिस रफ्तार से चल रहा है, उसने अवैध कब्जा करने वालों की नींद उड़ा दी है। लेकिन, ताज़ा घटनाक्रम ने प्रशासन और जनता दोनों को चौंका दिया है। अब जयपुर में डर का ऐसा असर दिख रहा है कि लोग बुल्डोजर के पहुंचने का इंतज़ार नहीं कर रहे, बल्कि खुद ही हथौड़ा उठाकर अपने अवैध निर्माणों को ढहा रहे हैं।
टोंक रोड पर दिखा बदलाव का बड़ा संकेत
ताजा मामला जयपुर के जोन-1 स्थित टोंक रोड का है। यहाँ जेकेजे (JKJ) ज्वैलर्स के पास एक भूखंड मालिक ने सड़क सीमा में छज्जे का अवैध निर्माण कर रखा था। अमूमन ऐसे मामलों में जेडीए की टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ता है और पुलिस बल की मदद लेनी पड़ती है। लेकिन यहाँ नजारा बदला हुआ था। जेडीए की सख्ती और पिछले दिनों हुई बड़ी कार्रवाइयों को देखते हुए, मालिक ने खुद ही लेबर लगवाकर अवैध निर्माण को हटाना शुरू कर दिया।सोशल मीडिया पर यह खबर 'बदलाव के संकेत' के रूप में वायरल हो रही है। जानकारों का मानना है कि जेडीए द्वारा की जा रही भारी पेनल्टी और ध्वस्तीकरण के खर्च की वसूली के डर से अब लोग स्वयं आगे आकर अतिक्रमण हटा रहे हैं।
करोड़ों की जमीन से हटा कब्जा, एक्शन में है जेडीए
पिछले कुछ दिनों में जेडीए ने जयपुर के अलग-अलग कोनों में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।जयसिंहपुरा खोर: यहाँ करीब 15 करोड़ रुपये की बेशकीमती 5 बीघा सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।किलनगढ़: यहाँ भी 12 करोड़ रुपये मूल्य की 4 बीघा जमीन पर बने अवैध निर्माणों को जेडीए के बुल्डोजर ने जमींदोज कर दिया।
क्यों बदला लोगों का मिजाज?
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जेडीए अब केवल अवैध निर्माण नहीं हटा रहा, बल्कि जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। बार-बार नोटिस देने के बाद भी जब लोग नहीं माने, तो जेडीए ने कड़े एक्शन लिए। टोंक रोड वाली घटना यह साबित करती है कि अब लोग समझ चुके हैं कि कानून का उल्लंघन महंगा पड़ेगा।

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