इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा में बड़ा कदम उठाते हुए 2026-27 सत्र से स्नातक और स्नातकोत्तर सभी पाठ्यक्रमों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भारतीय ज्ञान प्रणालियों (आईकेएस) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ स्टडी की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
बैठक की अध्यक्षता कुलगुरु राकेश सिंघई ने की, जिसमें कुलसचिव प्रज्वल खरे, प्रो. सचिन शर्मा सहित विभिन्न संकायों के डीन और बोर्ड ऑफ स्टडीज के अध्यक्ष शामिल हुए। अधिकारियों के अनुसार, दोनों विषयों का पाठ्यक्रम अगले कुछ सप्ताह में तैयार कर लिया जाएगा और इसे सभी कॉलेजों में लागू करना अनिवार्य होगा।
विश्वविद्यालय का दावा है कि यह पहल देश में अपनी तरह की पहली होगी, जहां हर कोर्स में एआई और आईकेएस को विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ भारत की पारंपरिक ज्ञान विरासत से भी जोड़ना है।
नई व्यवस्था के तहत विज्ञान, इंजीनियरिंग, मानविकी, वाणिज्य और प्रबंधन जैसे सभी क्षेत्रों में इन विषयों के मॉड्यूल जोड़े जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को एआई टूल्स, डेटा विश्लेषण और संगणनात्मक सोच का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा, वहीं वे भारतीय दर्शन, पारंपरिक विज्ञान और सतत विकास की अवधारणाओं को भी समझ सकेंगे।
कुलगुरु राकेश सिंघई ने कहा कि बदलते समय और राष्ट्रीय जरूरतों के अनुसार शिक्षा प्रणाली में बदलाव जरूरी है। यह पहल छात्रों को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें बहुविषयक ज्ञान और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार करेगी।
इसके साथ ही शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सहयोगी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे इस नए पाठ्यक्रम को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के संतुलन पर जोर दिया गया है।

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