निवेशकों का पैसा लौटाने के आदेश के बीच बिल्डर पर गंभीर टिप्पणियां, कोर्ट बोला- आखिर चल क्या रहा है?
मध्य प्रदेश के चर्चित आकृति बिल्डर्स (AG-8) प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डर हेमंत सोनी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। निवेशकों को राशि लौटाने के मामले में सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी मिली कि हेमंत सोनी ने अपने ही अधिवक्ता को कई संपत्तियां बेच दी हैं। इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि आखिर यह पूरा घटनाक्रम क्या है और मामले में क्या "नॉनसेंस" चल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
आकृति बिल्डर्स पर वर्षों से निवेशकों और खरीदारों का पैसा नहीं लौटाने के आरोप लगते रहे हैं। इस मामले में दर्जनों निवेशक न्यायालय की शरण में पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कंपनी और उसके प्रमोटर्स को निवेशकों का बकाया लौटाने के निर्देश दे चुका है।
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि हेमंत सोनी ने अपने अधिवक्ता को करोड़ों रुपये मूल्य की कई संपत्तियां बेच दी हैं। आरोप है कि करीब 2.85 करोड़ रुपये में पांच संपत्तियों का सौदा किया गया। इस जानकारी के सामने आने के बाद अदालत ने लेन-देन की प्रकृति और उसकी वैधता पर सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पूछा कि जब निवेशकों का पैसा लौटाना बाकी है तो संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया किस आधार पर की जा रही है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि निवेशकों के हितों को प्रभावित करने की कोशिश हुई है तो इसे गंभीरता से देखा जाएगा।
निवेशकों को राहत का संकेत
सूत्रों के मुताबिक अदालत ने निवेशकों के बकाया भुगतान को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए स्पष्ट किया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट पहले भी बिल्डर के खिलाफ सख्त रुख अपना चुका है और भुगतान नहीं होने की स्थिति में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है।
आगे क्या?
अब इस मामले में संपत्तियों के हस्तांतरण, भुगतान की स्थिति और निवेशकों के दावों की विस्तृत जांच की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर निवेशकों और रियल एस्टेट क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि अदालत के रुख से लंबे समय से अपने पैसे की प्रतीक्षा कर रहे निवेशकों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
नोट: मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अंतिम निष्कर्ष और जिम्मेदारी का निर्धारण अदालत के आदेशों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा।

Post a Comment