60 वर्ष की आयु पूरी होने के बावजूद कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखा, वेतन-भत्तों के भुगतान पर उठे सवाल; जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में
उज्जैन में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि दो कर्मचारियों को निर्धारित 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु पूरी होने के बाद भी करीब दो वर्ष तक सेवा में बनाए रखा गया। इस दौरान उन्हें सातवें वेतनमान का लाभ और अन्य वित्तीय भुगतान भी दिए गए।
मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नियमों की अनदेखी कर कर्मचारियों को सेवा जारी रखने की अनुमति देने और वित्तीय लाभ दिलाने के आरोपों की जांच की जा रही है।
यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ वित्तीय नुकसान की वसूली भी की जा सकती है।
बड़ा सवाल:
क्या यह महज प्रशासनिक लापरवाही थी या नियमों की अनदेखी कर किसी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया? अब इसका जवाब जांच रिपोर्ट तय करेगी।

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