नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए नियमों में किए गए बदलाव के बाद देश के कॉरपोरेट जगत में टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यदि टाटा संस को नियामकीय आवश्यकताओं के तहत शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना पड़ा, तो यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है।
RBI ने 'अपर लेयर' NBFCs के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की एसेट सीमा तय की है। केंद्रीय बैंक ने उद्योग जगत की सीमा बढ़ाने की मांग को स्वीकार नहीं किया है। नए ढांचे के तहत हर वर्ष ऐसी कंपनियों की पहचान की जाएगी, जिन पर अतिरिक्त नियामकीय निगरानी लागू होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टाटा संस को सूचीबद्ध होने की आवश्यकता पड़ती है, तो उसका आकार अब तक के कई बड़े आईपीओ से कहीं अधिक हो सकता है। इसी वजह से इसे संभावित रूप से देश का सबसे बड़ा IPO बताया जा रहा है। हालांकि, कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
नए नियमों का असर केवल टाटा संस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े कारोबारी समूहों की होल्डिंग संरचना और नियामकीय अनुपालन पर भी पड़ सकता है। RBI का उद्देश्य वित्तीय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण संस्थाओं पर प्रभावी निगरानी बनाए रखना और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले समय में बड़े कारोबारी समूह इन नियमों के अनुरूप क्या रणनीति अपनाते हैं।

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