नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था को पारदर्शिता और सुशासन का बड़ा माध्यम बताते हुए दावा किया है कि इसके जरिए अब तक 5.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। सरकार के अनुसार, डिजिटल तकनीक के उपयोग से फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से बाहर किया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगी है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 में डुप्लीकेट, फर्जी और अस्तित्वहीन राशन कार्डों को हटाने से 63 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई। वहीं मनरेगा में नकली और डुप्लीकेट जॉब कार्ड निरस्त किए जाने से 16,829 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बचत दर्ज की गई।
सरकार का कहना है कि छात्रवृत्ति, पेंशन, गैस सब्सिडी और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं में भी अयोग्य लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें सूची से हटाया गया। इससे लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचा और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक समाप्त हुई।
केंद्र सरकार के अनुसार, आधार, जनधन खातों और मोबाइल तकनीक के एकीकरण से लाभार्थियों को सीधे बैंक खातों में राशि हस्तांतरित की जा रही है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में दक्षता भी आई है।
सरकार का दावा है कि DBT प्रणाली ने कल्याणकारी योजनाओं में रिसाव कम करने और सार्वजनिक धन की बचत सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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