पटना। बिहार की राजनीति में सरकारी आवास को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी बंगले को खाली कराने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य सरकार ने उन्हें बंगला खाली करने के लिए आज (29 जून) तक का समय दिया था, लेकिन तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
दरअसल, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि सरकारी नियमों के अनुसार आवंटित समय के भीतर बंगला खाली करना होगा। सरकार का कहना है कि सरकारी आवासों का आवंटन नियमों के अनुरूप होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के लिए अलग व्यवस्था नहीं हो सकती।
दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया है।
यदि निर्धारित समय सीमा के बाद भी बंगला खाली नहीं किया जाता है, तो सरकार अगली कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, इस मामले में अंतिम फैसला प्रशासनिक प्रक्रिया और न्यायिक स्थिति के अनुसार ही होगा।
सरकारी आवास को लेकर छिड़ी इस सियासी जंग ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार अगला कदम क्या उठाती है और राबड़ी देवी की ओर से क्या फैसला लिया जाता है।

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