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म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जबलपुर के साथ किया समझौता ज्ञापन; मध्यस्थता पर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का शुभारंभMP State Legal Services Authority signs MoU with Dharmashastra National Law University, Jabalpur; launches certificate course on mediation

 

जबलपुर, 22 जून, 2026वैकल्पिक विवाद समाधान को विधिक शिक्षा तथा न्याय प्रदायगी प्रणाली में संस्थागत रूप देने की दिशा में एक म हत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जबलपुर ने आज एक समझौता ज्ञापन निष्पादित किया तथा "मध्यस्थता: संघर्ष से सहमति की ओर" शीर्षक तीन माह के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का संयुक्त रूप से शुभारंभ किया।


इस समारोह में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति आनंद पाठक एवं माननीय न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।

माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने अपने मुख्य भाषण में न्यायालयों पर वाद-भार को कम करने तथा नागरिकों को संवाद एवं सहमति के माध्यम से विवाद समाधान हेतु सशक्त बनाने में मध्यस्थता की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया। उनके माननीय आधिपत्य ने इस पहल को विधिक शिक्षा एवं दैनिक विवाद समाधान दोनों में मध्यस्थता को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सराहा।

माननीय श्री न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने विवाद समाधान के मानवीय पहलुओं पर विचार व्यक्त करते हुए इस बात पर बल दिया कि मध्यस्थता, संबंधों और गरिमा को अक्षुण्ण रखकर, प्रतिकूल वाद-विवाद की तुलना में न्याय का अधिक मानवीय और दीर्घस्थायी मार्ग प्रशस्त करती है।

माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने सहमति-आधारित विवाद समाधान की संस्कृति को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया तथा विधिक पेशेवरों को प्रोत्साहित किया कि वे मध्यस्थता को अंतिम विकल्प नहीं, अपितु विवाद समाधान का प्रथम विकल्प मानें।

धर्मशास्त्र के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिन्हा ने विश्वविद्यालय की इस प्रतिबद्धता को रेखांकित किया कि विधिक पेशेवरों और विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल से सुसज्जित किया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पाठ्यक्रम ऐसे प्रशिक्षित मध्यस्थों को तैयार करेगा जो समुदायों, न्यायालयों और संस्थाओं की प्रभावी ढंग से सेवा कर सकें।

समारोह के प्रारंभ में म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव ने सभी गणमान्य अतिथियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा इस सहयोग के संदर्भ को स्पष्ट करते हुए मध्यप्रदेश के नागरिकों को न्याय को अधिक सहभागी एवं सुलभ बनाने में मध्यस्थता की महत्त्वपूर्ण भूमिका को उजागर किया।

तत्पश्चात् प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिन्हा, कुलपति, DNLU, जबलपुर और सुश्री सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, MPSLSA द्वारा विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह हस्ताक्षर दोनों संस्थाओं के बीच शांतिपूर्ण विवाद समाधान के एक प्रभावी एवं समुदाय-केंद्रित तंत्र के रूप में मध्यस्थता को प्रोत्साहित करने हेतु एक सहयोगी ढाँचे को औपचारिक रूप प्रदान करता है।

इस अवसर पर म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के विधि प्रशिक्षुओं द्वारा मध्यस्थता के विषय पर तैयार चित्रों की शृंखला "सहमति का कैनवास" का भी प्रदर्शन किया गया, जो मध्यस्थता के सौहार्द के भाव का प्रतीक है।

यह प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, जिसे उच्चतम न्यायालय भारत की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति द्वारा औपचारिक मान्यता प्राप्त है, एक व्यापक 240 घंटे का कार्यक्रम है जो तीन माह में पूरा होगा। इसमें 144 घंटे के सैद्धांतिक सत्र सम्मिलित हैं जो मध्यस्थता अधिनियम 2023, संघर्ष का मनोविज्ञान, संप्रेषण कौशल, वार्ता तकनीक और व्यावसायिक नैतिकता को आच्छादित करते हैं। इसके अतिरिक्त 48 घंटे का व्यावहारिक प्रशिक्षण अनुकरण एवं भूमिका-नाटक के माध्यम से, तथा 48 घंटे का क्षेत्रीय अनुभव जिसमें सजीव न्यायालय-संलग्न एवं सामुदायिक मध्यस्थता कार्यवाहियों का प्रत्यक्ष अवलोकन सम्मिलित है, का भी प्रावधान है। पाठ्यक्रम की एक विशिष्ट विशेषता इसका 40 घंटे का मध्यस्थता प्रशिक्षण घटक है, जो उच्चतम न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति द्वारा नियुक्त प्रशिक्षकों एवं वरिष्ठ प्रशिक्षकों द्वारा संचालित किया जाएगा, जिससे मध्यस्थता निर्देश की उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। यह पाठ्यक्रम सम्मिश्रित आभासी एवं भौतिक प्रारूप में संचालित किया जाएगा, जिससे यह राज्य और राज्य से परे प्रतिभागियों के लिए व्यापक रूप से सुलभ होगा।

यह पाठ्यक्रम वर्ष में तीन बार संचालित किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक समूह तीन माह तक चलेगा। प्रथम बैच अगस्त 2026 में प्रारंभ होगा तथा यह कार्यक्रम अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, विधि विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO), सरकारी सेवकों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं विभिन्न व्यावसायिक पृष्ठभूमियों के अन्य इच्छुक व्यक्तियों के लिए खुला रहेगा। प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर, प्रमाणपत्रधारक विधिक सेवा संस्थाओं के साथ पंजीकृत हो सकते हैं तथा मध्यस्थता कार्यवाहियों में सक्रिय रूप से भाग ले सकते हैं। वे लंबित न्यायालय प्रकरणों में पक्षकारों के बीच विवाद समाधान में योगदान करते हुए मामलों की लंबितता को कम करने तथा विवादों के सौहार्दपूर्ण निपटान को बढ़ावा देने में सहायक हो सकते हैं।

इस गरिमामय अवसर पर धर्मशास्त्र के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिन्हा; मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल श्री धर्मिंदर सिंह एवं रजिस्ट्री के अधिकारीगण; प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जबलपुर श्री कृष्णमूर्ति मिश्रा; म.प्र. राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक श्री उमेश पांडव एवं अकादमी के अधिकारीगण; म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अतिरिक्त सचिव श्री अरविंद श्रीवास्तव, धर्मशास्त्र के संकाय सदस्य, जिला विधिक सहायता अधिकारी तथा विधि प्रशिक्षु उपस्थित रहे। साथ ही राज्यभर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सचिव (DLSA), जिला विधिक सहायता अधिकारी, पैनल अधिवक्ता एवं विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता आभासी माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम का संचालन म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के उप सचिव श्री अनिरुद्ध जैन द्वारा किया गया, जबकि धर्मशास्त्र के रजिस्ट्रार डॉ. प्रवीण त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए माननीय न्यायाधीशों, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण , मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति तथा समस्त गणमान्य अतिथियों के प्रति इस पहल को साकार करने में उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को यूट्यूब पर भी सजीव प्रसारित किया गया, जिससे राज्य के विभिन्न जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों से जुड़े पैरा-लीगल स्वयंसेवक एवं अन्य हितधारक आभासी माध्यम से सहभागी हो सके। व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु लाइव प्रसारण की अग्रिम सूचना बड़े पैमाने पर प्रसारित की गई, जिसके परिणामस्वरूप हितधारकों एवं आम जनमानस की ओर से पर्याप्त दर्शक संख्या एवं सहभागिता प्राप्त हुई।

म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को आशा है कि यह सहयोग तथा प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम मध्यस्थता की संस्कृति को सुदृढ़ करने, न्याय तक पहुँच को सुगम बनाने एवं मध्यप्रदेश तथा उसके परे दक्ष मध्यस्थता पेशेवरों के एक समूह के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देगा।

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