प्रणव बजाज
5 साल से बिना रोडमैप बढ़ रहा शहर, 79 गांव अधर में, अवैध बसाहट बेलगाम; आखिर जिम्मेदार कौन—सरकार, मंत्री या अफसरशाही?
भोपाल/इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर और मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को मेट्रोपॉलिटन सिटी बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर पिछले पांच वर्षों से बिना मास्टर प्लान के आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2021 में पुराना विकास प्लान समाप्त हो गया, लेकिन नया डेवलपमेंट प्लान-2035 आज तक लागू नहीं हो सका। अब सरकार का तर्क है कि पहले मेट्रोपॉलिटन रीजन की रूपरेखा बनेगी, उसके बाद नया मास्टर प्लान लागू किया जाएगा। इससे शहर का नियोजित विकास ठहर गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस देरी की जिम्मेदारी कौन लेगा? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेट्रोपॉलिटन मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विधानसभा में स्वीकार कर चुके हैं कि मास्टर प्लान तैयार है, लेकिन मेट्रोपॉलिटन विजन के कारण उसे रोका गया है। वहीं नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (T&CP) पांच साल में प्रारूप तक जनता के सामने नहीं ला पाया। नतीजा यह है कि न सरकार जवाबदेही तय कर रही है और न अफसरशाही
इस प्रशासनिक सुस्ती की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिक चुका रहा है। शहर से जुड़े 79 गांव विकास की अनिश्चितता में फंस गए हैं। इन क्षेत्रों में न निर्माण अनुमति मिल रही है, न स्पष्ट लैंड यूज तय है। इसी का फायदा उठाकर अवैध कॉलोनियां तेजी से बस रही हैं। वर्षों पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चेताया था कि मास्टर प्लान में देरी अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा दे रही है।
रियल एस्टेट और उद्योग जगत का कहना है कि नीति बनाकर उसे वर्षों तक लागू नहीं करना निवेशकों का भरोसा कमजोर करता है। अनिश्चितता के कारण विकास परियोजनाएं और निजी निवेश प्रभावित हो रहे हैं।
निशाने पर कौन?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव – मेट्रोपॉलिटन मॉडल को प्राथमिकता, लेकिन शहर का मास्टर प्लान लंबित।
नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय – मास्टर प्लान तैयार होने की बात स्वीकार, फिर भी लागू नहीं।
नगर एवं ग्राम निवेश विभाग (T&CP) – पांच वर्षों में नया विकास प्लान लागू नहीं कर पाया।
स्थानीय प्रशासन और विकास एजेंसियां – अवैध बसाहट रोकने और नियोजित विकास सुनिश्चित करने में विफल।
बड़ा सवाल
क्या इंदौर पहले महानगर बनेगा या पहले उसका भविष्य तय करने वाला मास्टर प्लान आएगा? यदि शहर बिना योजना के फैलता रहा, तो "मेट्रोपॉलिटन सिटी" का सपना कहीं अव्यवस्थित महानगर में न बदल जाए।

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