देश के कई बड़े शहर इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में पानी की उपलब्धता लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। इसी बीच वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने भारत में बढ़ते जल संकट को लेकर चेतावनी जारी की है।
रिपोर्ट के अनुसार यदि जल प्रबंधन, संरक्षण और वितरण व्यवस्था में समय रहते सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में भारत के कई शहरों को भीषण पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। एजेंसी ने कहा है कि जल संकट का असर केवल आम लोगों पर ही नहीं, बल्कि उद्योगों, कृषि क्षेत्र और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।
मुंबई में स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीएमसी के अनुसार शहर के जलाशयों में सीमित अवधि के लिए ही पानी बचा है। वहीं दिल्ली के कई इलाकों में पिछले कई दिनों से पानी की आपूर्ति बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बढ़ती आबादी, अनियोजित शहरीकरण, भूजल के अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन को संकट के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, रिसाइक्लिंग और बेहतर वितरण प्रणाली को प्राथमिकता देकर ही इस चुनौती से निपटा जा सकता है। मूडीज की चेतावनी ने एक बार फिर देश में जल सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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