जापान की प्रधानमंत्री अगले महीने अपनी पहली भारत यात्रा पर आ सकती हैं। इस दौरान वह प्रधानमंत्री के साथ भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगी। खास बात यह है कि इस बार बैठक के लिए दिल्ली या अहमदाबाद की बजाय गुवाहाटी को चुना गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार गुवाहाटी का चयन केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखता है। भारत सरकार लंबे समय से पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का केंद्र बना रही है। जापान इस क्षेत्र में सड़क, पुल, शहरी विकास और कनेक्टिविटी से जुड़ी कई परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। ऐसे में गुवाहाटी में शिखर वार्ता आयोजित करना पूर्वोत्तर भारत के विकास और भारत-जापान साझेदारी को नया संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि ताकाइची के साथ करीब 50 जापानी उद्योगपति और कारोबारी प्रतिनिधि भी आएंगे। इससे निवेश, विनिर्माण, तकनीक, सेमीकंडक्टर और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नए समझौतों की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गुवाहाटी को मेजबानी देकर भारत पूर्वोत्तर को वैश्विक निवेश और कूटनीतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने का संदेश देना चाहता है। यह दौरा दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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