प्रणव बजाज
डायमंड कॉलोनी की बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद ने पकड़ा तूल, पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट के बाद सियासत भी गरमाई; निष्पक्ष जांच की मांग तेज ।
इंदौर। शहर के ड्रायंग (डायमंड) कॉलोनी क्षेत्र में स्थित करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही जमीन का विवाद अब पुलिस, प्रशासन और राजनीति के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पहले इसे दो पक्षों के बीच संपत्ति विवाद माना जा रहा था, लेकिन पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट की घटना सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया। अब इस पूरे घटनाक्रम में प्रभावशाली लोगों की भूमिका, पुलिस की कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
कैसे बढ़ा मामला
जानकारी के अनुसार, विवादित जमीन डायमंड गृह निर्माण सोसायटी से जुड़ी है। वर्ष 2016 में जमीन का एक हिस्सा संयम इंफ्रा द्वारा खरीदे जाने के बाद से स्वामित्व और कब्जे को लेकर विवाद चलता रहा। हाल ही में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके दौरान पुलिस मौके पर पहुंची। इसी दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट की घटना हुई और मामला एफआईआर तक पहुंच गया।
पुलिस पर हमले के बाद बढ़ी गंभीरता
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट हो सकती है तो आम नागरिकों की सुरक्षा कितनी मजबूत है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन पूरे प्रकरण में कार्रवाई की रफ्तार और निष्पक्षता को लेकर चर्चा जारी है।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति पुलिसकर्मियों से मारपीट करने का साहस कर रहा है तो उसके पीछे किसका संरक्षण है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित जमीन की डील विशाल खंडेलवाल नाम के व्यक्ति द्वारा की गई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विशाल खंडेलवाल का पक्ष
रिपोर्ट के अनुसार, विशाल खंडेलवाल, जो एसएस ग्लोबल ग्रुप के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बताए जाते हैं, ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह केवल रास्ते को लेकर हुआ विवाद था, जिसे अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने अपने खिलाफ चल रही खबरों को भी निराधार बताया।
सिस्टम की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले ने प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के कारण कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो रही है। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह स्पष्ट होना बाकी है कि पुलिस पर हमला किन परिस्थितियों में हुआ, जमीन विवाद की वास्तविक स्थिति क्या है और आरोपों में कितनी सच्चाई है। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।
प्रमुख बिंदु
करीब 500 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर विवाद।
डायमंड गृह निर्माण सोसायटी और संयम इंफ्रा का नाम सामने आया।
पुलिसकर्मियों से कथित मारपीट के बाद एफआईआर दर्ज।
दिग्विजय सिंह ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए।
विशाल खंडेलवाल ने आरोपों से इनकार करते हुए विवाद को केवल रास्ते का मामला बताया।
पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग तेज।

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