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15 मौतों के बाद जागा सिस्टम: क्या हर हादसे के लिए लाशों का इंतजार जरूरी है?The system woke up after 15 deaths: Is it necessary to wait for dead bodies for every accident?

 

लखनऊ अग्निकांड पर एक्शन मोड में सरकार, SIT और LDA करेगी जांच; 7 दिन में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट

लखनऊ में भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार आखिरकार एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विशेष जांच दल (SIT) और विकास प्राधिकरण की टीम को मामले की गहन जांच सौंपी गई है। सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन को जागने के लिए हर बार किसी बड़े हादसे और कई निर्दोष लोगों की मौत का इंतजार करना पड़ता है? जिन इमारतों, अस्पतालों, होटलों, मॉल और व्यावसायिक परिसरों में सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती हैं, वहां जिम्मेदार विभाग पहले कार्रवाई क्यों नहीं करते?

अक्सर देखा गया है कि हादसे के बाद जांच समितियां बनती हैं, अधिकारियों की बैठकें होती हैं, नोटिस जारी होते हैं और कुछ दिनों तक सख्ती का माहौल रहता है। लेकिन समय बीतते ही सब कुछ फिर पुराने ढर्रे पर लौट आता है। नतीजा यह कि अगला हादसा होने तक व्यवस्था फिर गहरी नींद में चली जाती है।

लखनऊ अग्निकांड ने एक बार फिर फायर सेफ्टी, भवन अनुज्ञा और निगरानी तंत्र की पोल खोल दी है। यदि सुरक्षा मानकों का पालन समय रहते सुनिश्चित किया गया होता तो शायद 15 परिवारों के घरों के चिराग नहीं बुझते।

अब निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट पर हैं। लेकिन जनता सिर्फ रिपोर्ट नहीं, जवाबदेही चाहती है। सवाल यह है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के साथ-साथ उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या नहीं, जिनकी लापरवाही और अनदेखी के कारण यह त्रासदी हुई?

क्योंकि सच यही है कि हादसे आग नहीं लगाती, लापरवाही लगाती है। और जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक जांच रिपोर्टें आती रहेंगी और निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी।

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