मुंबई। विकास कार्यों के लिए फंड की कमी का आरोप लगाकर उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ने वाले सांसदों को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, शिंदे गुट में शामिल हुए कई बागी सांसदों ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत उपलब्ध कराए गए फंड का बेहद कम उपयोग किया। आंकड़े बताते हैं कि कुछ सांसदों ने अपने आवंटित फंड का केवल 1.07 प्रतिशत से 26.84 प्रतिशत तक ही खर्च किया, जबकि उनके पास विकास कार्यों के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध थे।
बताया जा रहा है कि इन सांसदों के पास सामूहिक रूप से लगभग 100 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध था, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं किया गया। ऐसे में विकास कार्यों के लिए धन की कमी का दावा अब सवालों के घेरे में आ गया है।
इस मुद्दे को लेकर शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो सांसद विकास के लिए फंड नहीं मिलने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़कर गए थे, वे पहले यह बताएं कि उपलब्ध फंड का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। राउत ने तंज कसते हुए कहा, "अब जनता को यह भी जानना चाहिए कि ये नेता आखिर किस फंड के प्रति वफादार हो गए हैं।"
इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है और बागी सांसदों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

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