वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच शांति स्थापना के लिए भारत और सऊदी अरब के सैनिकों को यूक्रेन भेजने का सुझाव दिया था। यह दावा एक नई राजनीतिक किताब में किया गया है, जिसमें ट्रंप प्रशासन के भीतर हुई चर्चाओं का उल्लेख किया गया है।
किताब के अनुसार, युद्धविराम और शांति व्यवस्था बनाए रखने के संभावित विकल्पों पर चर्चा के दौरान वेंस ने सवाल उठाया था कि क्या इस भूमिका के लिए अन्य देशों के सैनिकों को तैनात किया जा सकता है। इसी क्रम में उन्होंने "सऊदी अरब या भारत" जैसे देशों के सैनिकों को शांति सेना के रूप में भेजने का सुझाव दिया।
दावे के मुताबिक, इस सुझाव पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी और कहा, "भारतीय ऐसा नहीं करेंगे।"
किताब में वर्णित यह बातचीत उस समय की बताई गई है जब अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए विभिन्न कूटनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा था। हालांकि, भारत ने हमेशा इस संघर्ष को लेकर संतुलित रुख अपनाया है और बातचीत व कूटनीति के जरिए समाधान पर जोर दिया है।
भारत ने अब तक किसी भी सैन्य गठबंधन या शांति सेना भेजने संबंधी प्रस्ताव पर सार्वजनिक रूप से सहमति नहीं जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रही है, इसलिए ऐसे किसी भी कदम पर नई दिल्ली बेहद सावधानी से निर्णय लेती है।
यह दावा सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि वैश्विक संकटों के समाधान में भारत की भूमिका को किस नजरिए से देखा जा रहा है।

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