नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और हालिया शांति समझौते के बाद भारतीय कंपनियों के लिए राहत की खबर सामने आई है। रेटिंग एजेंसी CRISIL के अनुसार, क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के फिर से सुचारु रूप से खुलने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा, जिससे भारत की कंपनियों के परिचालन खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है।
क्रिसिल के आकलन के मुताबिक, पहले आशंका जताई जा रही थी कि क्षेत्रीय तनाव के कारण भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में करीब 200 बेसिस पॉइंट (2%) तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि, हालात में सुधार के बाद अब यह संभावित नुकसान घटकर 100 बेसिस पॉइंट (1%) तक सीमित रहने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से पेट्रोलियम, पेंट, केमिकल, सीमेंट, लॉजिस्टिक्स, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे ऊर्जा-निर्भर क्षेत्रों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। इससे परिवहन लागत घटेगी, आयात बिल कम होगा और कंपनियों की लाभप्रदता में सुधार आने की संभावना है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सामान्य रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था, महंगाई नियंत्रण और कॉर्पोरेट सेक्टर—तीनों को इसका सकारात्मक लाभ मिल सकता है।:::

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