प्रणव बजाज
मोहन कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं से भोपाल के गलियारों में बढ़ी हलचल, कई चेहरों की धड़कनें तेज
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है—"कौन आएगा और कौन जाएगा?" मानसून सत्र के बाद मोहन सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक कई मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो चुका है और प्रदर्शन के आधार पर बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। कुछ मौजूदा मंत्रियों की विदाई और कई नए चेहरों की एंट्री की अटकलें लगाई जा रही हैं।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पार्टी नेतृत्व सरकार के दूसरे चरण की तैयारी में जुटे हैं। संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल, क्षेत्रीय संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर नई टीम तैयार की जा सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा में मंत्रिपद अब केवल वरिष्ठता से नहीं, बल्कि प्रदर्शन और संगठन के प्रति उपयोगिता से तय हो रहा है। यही वजह है कि कुछ मंत्री इन दिनों अपने विभागों की उपलब्धियां गिनाने में व्यस्त हैं, जबकि कई विधायक भोपाल से लेकर दिल्ली तक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार विकास और जनता के मुद्दों से ज्यादा सत्ता संतुलन साधने में व्यस्त है, जबकि भाजपा इसे बेहतर प्रशासन और नई ऊर्जा का प्रयास बता रही है।
फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि मानसून सत्र के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री आवास और दिल्ली दरबार पर टिकी हैं, जहां से तय होगा कि सत्ता की नई बिसात पर कौन मोहरा आगे बढ़ेगा और किसकी राजनीतिक पारी फिलहाल थम जाएगी।
सियासी तंज:
"भोपाल में बारिश कब होगी, यह मौसम विभाग बताएगा... लेकिन मंत्रिमंडल में कौन बरसेगा और कौन तरसेगा, यह दिल्ली तय करेगी!"

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