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40 करोड़ के आरोप पर घिरीं महुआ मोइत्रा, TMC के 20 बागी सांसद मानहानि केस की तैयारी मेंMahua Moitra faces allegations of Rs 40 crore, 20 rebel TMC MPs prepare to file defamation case

 

‘खरीद-फरोख्त’ वाले बयान पर बढ़ा विवाद, बागी सांसद बोले- आरोप साबित करें या माफी मांगें

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता महुआ मोइत्रा एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। पार्टी छोड़कर एनडीए का समर्थन करने वाले टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। विवाद की जड़ महुआ का वह बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि दल बदलने वाले सांसदों को 40 करोड़ रुपये तक की रिश्वत दी गई थी।


बागी सांसदों का कहना है कि महुआ मोइत्रा ने बिना किसी सबूत के गंभीर आरोप लगाकर उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाया है। उनका कहना है कि यदि आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।

यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब टीएमसी में बड़ी राजनीतिक टूट देखने को मिली और कई सांसदों ने पार्टी से अलग होकर एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया। इसके बाद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि सांसदों की निष्ठा बदलने के पीछे भारी धनराशि का खेल हुआ है।

राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। विपक्षी दल इसे लोकतंत्र और जनादेश की खरीद-फरोख्त का मामला बता रहे हैं, जबकि बागी सांसदों का आरोप है कि यह उनकी छवि धूमिल करने की सोची-समझी कोशिश है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मानहानि का मामला अदालत तक पहुंचता है तो महुआ मोइत्रा को अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं। वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो मामला उनके लिए कानूनी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

फिलहाल इस मुद्दे ने बंगाल की राजनीति में नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि महुआ मोइत्रा अपने आरोपों पर कायम रहती हैं या विवाद को शांत करने के लिए कोई नया रुख अपनाती हैं।

सियासी तंज:

"राजनीति में आरोप लगाना आसान है, लेकिन अदालत में हर शब्द का हिसाब देना पड़ता है। चुनावी मंच की तालियां और अदालत की दलीलें अक्सर अलग-अलग भाषा बोलती हैं।"

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