नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत तेज हो गई है। दोनों देशों के बीच इस सप्ताह मंत्री स्तर की अहम वार्ता होने जा रही है, जिसका उद्देश्य लंबित मुद्दों का समाधान निकालना और संभावित टैरिफ संकट को टालना है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों के लिए बेहतर और प्राथमिकता आधारित पहुंच चाहता है। हालांकि अमेरिकी टैरिफ नीतियों और कुछ प्रस्तावित शुल्कों के कारण समझौते की प्रक्रिया में चुनौतियां बनी हुई हैं।
सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के वार्ताकार बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ बाधाओं, कस्टम प्रक्रियाओं, निवेश प्रोत्साहन और व्यापार सुगमता जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा कर रहे हैं। जून के पहले सप्ताह में हुई चार दिवसीय वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
भारत की चिंता यह भी है कि यदि अमेरिकी टैरिफ बढ़ते हैं तो भारतीय निर्यातकों, विशेषकर वस्त्र, स्टील और विनिर्माण क्षेत्र पर असर पड़ सकता है। वहीं अमेरिका अपने व्यापारिक हितों और बाजार पहुंच को लेकर कुछ शर्तों पर जोर दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता समय पर हो जाता है तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे, भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा तथा संभावित टैरिफ विवाद से बचा जा सकेगा। वर्तमान में भारत और अमेरिका दोनों ही इस समझौते को आर्थिक साझेदारी के नए अध्याय के रूप में देख रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच चल रही यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार माहौल में अनिश्चितता बढ़ी हुई है और कई देश नए शुल्क एवं व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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