राजवाड़ा से कृष्णपुरा तक अतिक्रमण का आलम, पैदल चलने वालों की मुश्किलें बढ़ीं
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में शहर की सुंदरता और यातायात व्यवस्था के दावों के बीच एक कड़वी हकीकत भी सामने आ रही है। शहर के सबसे व्यस्त बाजार क्षेत्रों में शामिल राजवाड़ा से कृष्णपुरा तक कई स्थानों पर फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि दुकानों के पुतलों और सामान के प्रदर्शन का माध्यम बन गए हैं।
स्थिति यह है कि फुटपाथों पर दुकानदारों ने कपड़ों के पुतले, स्टैंड और अन्य सामग्री रखकर बड़ी जगह घेर ली है। नतीजतन राहगीरों को फुटपाथ छोड़कर सड़क पर चलना पड़ रहा है, जहां हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोग, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता है, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठानों द्वारा फुटपाथों पर कब्जा करने से पैदल चलने वालों का अधिकार लगातार प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फुटपाथों का निर्माण पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए किया जाता है, लेकिन जब उन पर व्यावसायिक गतिविधियां होने लगती हैं तो पूरा उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। इससे यातायात भी प्रभावित होता है और सड़क पर भीड़ बढ़ती है।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि बाजार क्षेत्रों में नियमित निगरानी कर फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए, ताकि पैदल यात्रियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
सवाल यही है कि आखिर फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए बने हैं या फिर दुकानों के पुतलों और सामान की प्रदर्शनी के लिए?

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