ईरान और अमेरिका के बीच हालिया तनाव कम होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अभी बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार अभी भी भू-राजनीतिक जोखिमों और आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं को लेकर सतर्क बना हुआ है, जिसके कारण तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार तेल बाजार की नजर विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल निर्यात होता है। भले ही सैन्य तनाव कम हुआ हो, लेकिन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने और शिपिंग गतिविधियों में स्थिरता आने तक कीमतों में बड़ी राहत की संभावना कम है।
इसके अलावा प्रमुख तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के संकेत और वैश्विक मांग की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित कर रही है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि आने वाले हफ्तों में आपूर्ति बाधित नहीं होती और उत्पादन में वृद्धि होती है, तब कच्चे तेल के दामों में नरमी आ सकती है।
भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतें बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका सीधा असर पेट्रोल, डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ता है। फिलहाल उपभोक्ताओं को ईंधन कीमतों में तत्काल राहत मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। बाजार की नजर अब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और तेल उत्पादक देशों के अगले कदमों पर टिकी हुई है।

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