योग अब केवल स्वास्थ्य और फिटनेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देने वाला बड़ा उद्योग बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर जारी आंकड़े बताते हैं कि भारत में योग और वेलनेस से जुड़ा बाजार लगातार विस्तार कर रहा है।
मार्केट रिसर्च संस्था ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार वर्ष 2025 में भारत के योग बाजार का आकार 6.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी 57 हजार करोड़ रुपये से अधिक आंका गया था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2033 तक यह बाजार 10 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) के साथ बढ़कर करीब 18 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है।
योग की बढ़ती लोकप्रियता के साथ योग प्रशिक्षण केंद्रों, ऑनलाइन क्लासेस, वेलनेस रिट्रीट्स, फिटनेस ऐप्स, योग परिधान और स्वास्थ्य उत्पादों की मांग में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। देश के साथ-साथ विदेशों में भी भारतीय योग प्रशिक्षकों और संस्थानों की मांग बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता, तनावपूर्ण जीवनशैली और प्राकृतिक स्वास्थ्य उपायों की ओर लोगों का रुझान योग उद्योग के विस्तार के प्रमुख कारण हैं। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं और भारत वैश्विक वेलनेस बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

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