वैश्विक बाजार में क्रूड महंगा, लेकिन देश में तेल कंपनियों ने नहीं बदले खुदरा ईंधन के भाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड महंगा होने के बावजूद भारत में सोमवार को पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम पहले की तरह ही बरकरार रखे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर आने वाले समय में ईंधन कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। फिलहाल घरेलू स्तर पर उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है, क्योंकि तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का बोझ खुदरा कीमतों पर नहीं डाला है।
बाजार की नजर अब पश्चिम एशिया की स्थिति, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति पर बनी हुई है, क्योंकि यही कारक आगे पेट्रोल-डीजल की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

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