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शिप्रा किनारे नियमों पर बुलडोजर? नो-कंस्ट्रक्शन जोन में सड़क निर्माण की तैयारी से उठे सवालBulldozers flouting rules along the Shipra River? Preparations for road construction in a no-construction zone raise questions.

 

200 मीटर की जगह 100 मीटर दूरी पर सड़क बनाने की योजना, पर्यावरण और नियमों को लेकर बढ़ी चिंता

उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में शिप्रा नदी के घाटों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित समानांतर सड़क परियोजना विवादों में आ गई है। आरोप है कि परियोजना के मूल स्वरूप में बदलाव कर सड़क को नो-कंस्ट्रक्शन जोन के अधिक करीब लाने की तैयारी की जा रही है। इससे पर्यावरणीय नियमों और नदी संरक्षण को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।


जानकारी के अनुसार, शिप्रा नदी के लगभग 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र और अन्य घाटों को आपस में जोड़ने के लिए समानांतर सड़क प्रस्तावित है। प्रारंभिक योजना में सड़क को नदी से लगभग 200 मीटर की दूरी पर विकसित करने का विचार था, लेकिन अब इसे करीब 100 मीटर दूरी पर लाने की तैयारी की चर्चा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नदी तटों के आसपास निर्धारित नो-कंस्ट्रक्शन जोन का उद्देश्य प्राकृतिक प्रवाह, पर्यावरणीय संतुलन और नदी तंत्र की सुरक्षा करना होता है। ऐसे में यदि सड़क निर्माण निर्धारित मानकों के विपरीत किया जाता है तो भविष्य में पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण से जुड़े लोगों का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि सिंहस्थ और बढ़ते यातायात को देखते हुए आधारभूत संरचना विकसित करना आवश्यक है।

अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सड़क निर्माण की अंतिम रूपरेखा क्या होगी और क्या परियोजना सभी वैधानिक तथा पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए आगे बढ़ाई जाएगी। यह मामला विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की नई बहस को जन्म दे रहा है।

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