56 आपराधिक आरोपों ने फिर खड़े किए सवाल, विदेशों में भारतीयों की मेहनत पर भारी पड़ रहे अपराधी
कनाडा के कैलगरी में 16 भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी और उन पर जबरन वसूली, गोलीबारी तथा हिंसा जैसे 56 गंभीर आपराधिक आरोप केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं है, बल्कि भारत की वैश्विक छवि पर भी सवाल खड़े करने वाली घटना है।
दुनिया भर में करोड़ों भारतीय अपनी मेहनत, ईमानदारी और प्रतिभा से पहचान बना रहे हैं। लेकिन कुछ अपराधी ऐसे हैं जो विदेश की धरती पर भी गैंग बनाकर उसी पहचान को दागदार करने में लगे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब विदेशों में भारतीय मूल के संगठित अपराध, उगाही और गैंगवार की खबरें लगातार सामने आने लगी हैं। इससे स्थानीय समाज में पूरे भारतीय समुदाय को संदेह की नजर से देखा जाने लगता है, जबकि अधिकांश भारतीय कानून का पालन करने वाले नागरिक होते हैं।
सवाल यह भी है कि आखिर ऐसे लोग विदेश पढ़ने, काम करने या बसने जाते हैं या अपराध का नेटवर्क खड़ा करने? यदि कोई व्यक्ति दूसरे देश के कानून को चुनौती देता है, तो उसे कानून के अनुसार सख्त सजा मिलनी ही चाहिए।
भारत सरकार को भी ऐसे मामलों में संबंधित देशों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई हो और विदेशों में भारत की सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कोई नरमी न बरती जाए।
विदेश में भारत का सम्मान केवल तिरंगा लहराने से नहीं बढ़ता, बल्कि भारतीय नागरिकों के आचरण से भी तय होता है। कुछ अपराधियों की वजह से पूरी कौम की छवि धूमिल नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि ऐसे मामलों पर चुप्पी समाधान नहीं है। अपराधी की पहचान उसके अपराध से होनी चाहिए, न कि उसकी राष्ट्रीयता से उसे बचाने की कोशिश की जानी चाहिए।

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