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जंगल में जहर! कटनी के तालाब में जहर घोलकर 14 बेजुबानों की हत्या... अब बाघों की जान पर भी मंडरा रहा खतराPoison in the forest! 14 animals killed by poisoning a pond in Katni... Now, tigers are also in danger.

 


मध्यप्रदेश के कटनी जिले से आई यह खबर केवल वन्यजीवों की मौत नहीं, बल्कि जंगल के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर सुनियोजित हमला है। तालाब में कथित रूप से जहर मिलाए जाने से 14 चीतल और सांभरों की मौत हो गई। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन्हीं मृत जानवरों को खाने वाले बाघ, तेंदुए और अन्य मांसाहारी वन्यजीव भी जहर की चपेट में आ सकते हैं।


वन विभाग ने क्षेत्र को अलर्ट पर रख दिया है। जलस्रोतों की निगरानी बढ़ा दी गई है, संदिग्ध शिकारियों से पूछताछ जारी है और पूरे इलाके में गश्त तेज कर दी गई है। मृत वन्यजीवों के नमूनों की जांच कर यह पता लगाया जा रहा है कि पानी में कौन-सा विषैला पदार्थ मिलाया गया था।

लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं कि जहर किसने मिलाया? सवाल यह भी है कि जंगल के भीतर मौजूद जलस्रोत तक अपराधी आखिर पहुंचे कैसे? क्या वन सुरक्षा तंत्र इतना कमजोर हो चुका है कि कोई बेखौफ होकर पूरे तालाब को जहर से भर दे?

यदि यह घटना शिकार के इरादे से अंजाम दी गई है, तो यह साधारण वन अपराध नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण कानून की खुली चुनौती है। एक तालाब में जहर घोलना केवल 14 जानवरों को मारना नहीं, बल्कि पूरे खाद्य-श्रृंखला को जहरीला बना देना है।

कटनी की यह घटना चेतावनी है कि वन माफिया अब बंदूक से ज्यादा जहर का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे अपराधियों पर केवल मामला दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा। इन्हें ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो भविष्य में किसी भी शिकारी को जंगल की ओर आंख उठाकर देखने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर कर दे।


जंगल केवल जानवरों का घर नहीं, प्रकृति की धड़कन हैं। यदि तालाबों में जहर घोला जाएगा, तो मरेंगे सिर्फ चीतल और सांभर नहीं—मरता जाएगा हमारा पर्यावरण, हमारी जैव विविधता और आने वाली पीढ़ियों का प्राकृतिक भविष्य।

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