भोपाल। राजधानी के स्वास्थ्य विभाग में कमीशनखोरी के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। सूत्रों के मुताबिक निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों, पैथोलॉजी लैब और अस्पतालों से कथित कमीशन लेने के आरोप में करीब 100 सरकारी डॉक्टर जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। मामले की जांच अब केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसकी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों और शासन स्तर तक पहुंच गई है।
बताया जा रहा है कि मरीजों को विशेष निजी अस्पतालों, जांच केंद्रों और मेडिकल संस्थानों में भेजने के बदले डॉक्टरों को आर्थिक लाभ मिलने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध लेन-देन और रेफरल पैटर्न सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। संबंधित डॉक्टरों की संपत्तियों, बैंक खातों और सेवा रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत भी कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, अभी तक विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से किसी डॉक्टर का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और मरीजों के हितों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह तय होगा कि यह कार्रवाई कुछ लोगों तक सीमित रहती है या पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होता है।

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