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विदेशी आय या बैंक खाते की जानकारी छिपाई तो लग सकता है ₹10 लाख तक का जुर्मानाConcealing information about foreign income or bank accounts can attract a fine of up to ₹10 lakh.

 


नई दिल्ली। आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय विदेशी आय, बैंक खाते, संपत्ति या विदेशी कंपनियों में निवेश की जानकारी छिपाना करदाताओं के लिए भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) कानून के तहत 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।


आयकर नियमों के मुताबिक, भारत में कर निवासी (Resident) व्यक्तियों को अपनी विदेशी संपत्तियों, बैंक खातों, वित्तीय हितों और विदेश से प्राप्त आय का विवरण आयकर रिटर्न में देना अनिवार्य है। यह जानकारी रिटर्न के निर्धारित विदेशी परिसंपत्ति (Foreign Assets) अनुभाग में दर्ज करनी होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न देशों के बीच वित्तीय सूचनाओं के स्वतः आदान-प्रदान की व्यवस्था मजबूत हुई है। इसके चलते भारतीय कर विभाग को विदेशी खातों और निवेश से संबंधित जानकारी प्राप्त होने लगी है। ऐसे में विदेश में मौजूद आय या संपत्ति को छिपाना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है।

कर विशेषज्ञों के अनुसार, गलत जानकारी देने या आवश्यक जानकारी छिपाने पर न केवल आर्थिक दंड लगाया जा सकता है, बल्कि कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है। इसलिए करदाताओं को रिटर्न दाखिल करते समय सभी विदेशी आय और परिसंपत्तियों का सही एवं पूर्ण विवरण देना चाहिए।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि किसी करदाता को विदेशी निवेश या आय की रिपोर्टिंग को लेकर संदेह हो, तो वह कर सलाहकार की मदद लेकर रिटर्न सही तरीके से दाखिल करे।

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