भारत ने समुद्री क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वैश्विक शिप रीसाइक्लिंग उद्योग में पहला स्थान प्राप्त कर लिया है। देश ने की रिपोर्ट के अनुसार जहाज रीसाइक्लिंग में 35.4 प्रतिशत वैश्विक हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जिससे वह दुनिया का अग्रणी शिप-रीसाइक्लिंग देश बन गया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत ने के तहत निर्धारित लक्ष्य को तय समय से काफी पहले हासिल कर लिया है। सरकार ने वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने का लक्ष्य रखा था, जिसे अब समय से पहले ही पूरा कर लिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार गुजरात के अलंग जैसे शिप-ब्रेकिंग यार्डों के आधुनिकीकरण, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के उपयोग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के पालन ने भारत की स्थिति को मजबूत बनाया है। जहाज रीसाइक्लिंग उद्योग से बड़ी मात्रा में स्टील और अन्य उपयोगी धातुओं की पुनर्प्राप्ति होती है, जिससे संसाधनों की बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है।
केंद्र सरकार का मानना है कि इस उपलब्धि से समुद्री अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और भारत वैश्विक समुद्री व्यापार तथा ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा। यह सफलता भारत के बढ़ते समुद्री सामर्थ्य और औद्योगिक क्षमता का भी प्रतीक मानी जा रही है।

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