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तेल-गैस के बाद अब रूलाएगा पानी! ईरान जंग की वजह से बढ़ गए पैकेज्ड वॉटर के दाम, जान लें 1 लीटर के लिए कितने होंगे खर्च?After Oil and Gas, Now Water Will Bring You to Tears! Packaged Water Prices Soar Due to the Iran Conflict—Find Out How Much a Single Liter Will Cost You.

 

प्लास्टिक बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल की कीमत लगभग 50% बढ़कर 170 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. वहीं, बोतल के ढक्कन की कीमत भी दोगुने से ज्यादा बढ़कर लगभग ₹0.45 प्रति पीस हो गई है.



तेल-गैस के रूलाने के बाद अब प्यासा रखेगा पानी

इजरायल-अमेरिका और ईरान की जंग का असर कच्चे तेल, LPG गैस पर दिखने लगा है. अब पानी की बारी है. ईरान संकट के बाद भारत के बोतलबंद पानी का बिजनेस करीब 45 हजार करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा पहुंच गया है. बोतलबंद पानी के कारोबार में इस्‍तेमाल होने वाले सामग्रियों की इनपुट कॉस्‍ट बढ़ गई है. जिससे पूरे बिजनेस पर असर पड़ रहा है. इसलिए अब इस बिजनेस में लगी कंपनियों ने पानी के बोतल के दाम बढ़ाने का फैसला किया है.

2000 छोटे बोतलबंद पानी रीसेलर्स को हो रहा नुकसान

ऑल इंडिया पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पैकेज्ड वॉटर के रिटेल प्राइस पर अभी असर नहीं पड़ा है. बड़ी कंपनियां इस बढ़ती लागत को खुद झेल रही हैं, लेकिन करीब 2,000 छोटे बोतलबंद पानी निर्माता अपने रीसेलर्स के लिए प्रति बोतल 1 रुपये यानी 5% की बढ़ोतरी कर चुके हैं. ये आने वाले दिनों में 10% और बढ़ सकती है. ग्राहक आमतौर पर एक लीटर बोतल के लिए 20 रुपये या 20 अमेरिकी सेंट से कम ही चुकाते हैं.

जंग से पैकेज्ड वॉटर बिजनेस की कॉस्टिंग कैसे बढ़ी?

प्लास्टिक बोतल बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमत 50% बढ़कर 170 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जबकि कैप की कीमत दोगुनी से ज्यादा बढ़कर 0.45 रुपये प्रति कैप हो गई है. यहां तक कि कार्डबोर्ड बॉक्स, लेबल और चिपकने वाली टेप भी पहले से कहीं ज्यादा महंगी हो गई हैं. बढ़ती तेल की कीमतों ने पॉलिमर की लागत बढ़ा दी है, जो कच्चे तेल से बनता है और प्लास्टिक बोतलों के लिए जरूरी सामग्री है. फेडरेशन का कहना है कि अभी बाजार में अफरा-तफरी है. अगले 4-5 दिनों में इसका असर ग्राहक की कीमतों पर दिखने लगेगा.

पानी के दाम बढ़ने से भारत पर कितना पड़ेगा असर?

देश में 70% ग्राउंड वॉटर पॉल्यूटेड है. दिल्ली-NCR, मुंबई जैसे महानगरों में लोग बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं. बिसलेरी, कोका-कोला की किनले, पेप्सी की एक्वाफिना, टाटा जैसी कंपनियां 5 अरब डॉलर के बाजार में हिस्सेदारी के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं. बोतलबंद पानी के बड़े बाजार में, नेचुरल मिनरल वॉटर भारत में 40 करोड़ डॉलर का कारोबार है और अमीरों के लिए एक नया व तेजी से बढ़ता वेलनेस प्रोडक्ट है.

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