परीक्षा में किसी और को बैठाकर नौकरी हड़पने के आरोप
इंदौर। (तेज कुमार सेन)। एमपी ग्रामीण बैंक में फर्जीवाड़े से नौकरी हासिल करने के मामले में गिरफ्तार 11 आरोपियों को जमानत सीबीआई के विशेष न्यायाधीश रूपम वेदी कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई।
जिन आरोपियों की जमानत अर्जी निरस्त हुई इनके नाम आरोपी रूपलाल मीणा, मुनेश कुमार मीणा, आशीष कुमार मीणा, विमलेश मीणा ये सभी निवासी जिला सवाई माधोपुर राजस्थान, रवि कुमार मीणा, शिवकेश मीणा एवं आलोक कुमार मीणा ये सभी निवासी जिला करौली राजस्थान, विजय सिंह मीणा एवं सुरेश चंद्र सैनी ये सभी निवासी जिला दोसा राजस्थान, कुमार निखिल पांडे निवासी समस्तीपुर बिहार एवं जितेंद्र सिंह निवासी जिला भरतपुर राजस्थान है। आरोप है कि आईबीपीएस (इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन) में चयन के दौरान अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाए गए थे। सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक चंद्रपाल की ओर से जमानत पर आपत्ति लेते हुए तर्क में कहा गया कि प्रकरण की विवेचना जारी है। इसमें अभी सॉल्वर पकड़े जाना है। इन्हें जमानत दी गई तो ये केस को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे।
यह है मामला
एमपी ग्रामीण बैंक में भर्ती प्रक्रिया में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। सीबीआई ने मामले में बैंक के 14 अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। आईबीपीएस से प्राप्त सूचना के आधार पर बैंक द्वारा अधिकारियों का बायोमेट्रिक पुन: सत्यापन कराया गया। इस सत्यापन में परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों और नौकरी ज्वाइन करने वाले अधिकारियों के बायोमेट्रिक (आईरिस, फिंगरप्रिंट व फोटो) में अंतर पाया गया था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि चयनित अभ्यर्थियों की जगह किसी अन्य व्यक्ति ने परीक्षा दी थी। इस पर सीबीआई ने नौ जनवरी 2026 को राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश में छापे मारे थे। इस दौरान आधार अपडेट से जुड़े दस्तावेज मिले, जो चयन प्रक्रिया में हेरफेर के संकेत देते हैं। जांच के दौरान टीसीएस के सहयोग से आरोपितों का बायोमेट्रिक सत्यापन कराया गया। आईबीपीएस की रिपोर्ट में 11 अधिकारियों के बायोमेट्रिक मेल नहीं खाने की पुष्टि हुई। इसके बाद सीबीआई ने 23 फरवरी 2026 को 11 आरोपित अधिकारियों को गिरफ्तार किया था।
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