20 हजार लोगों की नौकरी गई, 30 हजार की सैलरी आधी; 3 शिफ्ट से 1 शिफ्ट पर सिमटा काम
मध्यप्रदेश के औद्योगिक सेक्टर पर गहराता संकट अब खुलकर सामने आने लगा है। राज्य की करीब 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर हैं, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है।
उद्योगों में मंदी का असर सबसे ज्यादा कर्मचारियों पर पड़ा है। अब तक करीब 20 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है, जबकि लगभग 30 हजार कर्मचारियों की सैलरी आधी कर दी गई है।
* उत्पादन पर भी असर
पहले जहां कई फैक्ट्रियां तीन शिफ्ट में काम करती थीं, अब वहां सिर्फ एक शिफ्ट में उत्पादन हो रहा है
उत्पादन घटने से कंपनियों की लागत और दबाव दोनों बढ़ गए हैं
ऑर्डर में कमी और बाजार की सुस्ती ने स्थिति और बिगाड़ी है
* संकट की वजहें
उद्योग जगत के जानकारों के अनुसार:
बाजार में मांग में गिरावट
कच्चे माल की बढ़ती कीमतें
बिजली और संचालन लागत में इजाफा
फाइनेंस और लोन का दबाव
*मजदूरों पर सीधा असर
नौकरी जाने और सैलरी कटने से श्रमिक वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। कई परिवारों के सामने अब रोजमर्रा के खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।
* सरकार और उद्योग जगत की चिंता
उद्योग संगठनों ने सरकार से मांग की है कि:
बिजली दरों में राहत दी जाए
टैक्स और लोन में छूट मिले
छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए विशेष पैकेज लाया जाए
मध्यप्रदेश में उद्योगों की यह स्थिति सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक संकट का संकेत भी दे रही है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

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