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पुजारी की एक सलाह… और खाली हो गया पूरा गांव, मौत के तांडव से बचने के लिए जंगल में डेरा डाल रहे लोगA Priest's Advice... And the Entire Village Empties Out; People Camp in the Forest to Escape the Dance of Death.

 

तेलंगाना के करीमनगर जिले का गांद्रपल्ली गांव इन दिनों किसी फिल्म के डरावने दृश्य जैसा प्रतीत हो रहा है. कभी उत्सवों और चहल-पहल से गुलजार रहने वाला यह गांव आज सन्नाटे और खौफ की चादर ओढ़े हुए है. पिछले 90 दिनों के भीतर गांव में एक के बाद एक हुई 28 मौतों ने ग्रामीणों के मन में ऐसा डर बैठा दिया है कि पूरा गांव सामूहिक रूप से घर छोड़कर जंगल की ओर पलायन कर गया है.


गांद्रपल्ली में मौतों का यह सिलसिला पिछले तीन महीनों से जारी है. चौंकाने वाली बात यह है कि मरने वालों में केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि स्वस्थ युवा भी शामिल हैं. विभिन्न कारणों से हुई इन लगातार मौतों ने ग्रामीणों को यह विश्वास दिला दिया है कि गांव पर किसी बुरी शक्ति का साया मंडरा रहा है. विज्ञान के इस युग में भी, दहशतजदा ग्रामीणों ने डॉक्टरों के बजाय पुजारियों की शरण लेना बेहतर समझा.

ग्रामीणों ने जब गांव के बुजुर्गों और ज्योतिषियों से गुहार लगाई, तो समाधान के तौर पर एक अजीबोगरीब सलाह सामने आई. पुजारी ने गांव की ‘कुंडली’ देखकर बताया कि गांव पर भारी विपत्ति है और इसे टालने के लिए पूरे गांव को खाली करना होगा.

पुजारी के निर्देश पर गांव में पारंपरिक ‘दप्पू’ (एक प्रकार का माओरी अनुष्ठान) किया गया. गुरुवार तड़के ही सभी ग्रामीणों ने अपने घरों में ताला लगा दिया. मासूम बच्चों और मवेशियों के साथ पूरा गांव बाहरी इलाके और पास के जंगल में चला गया. वहां लोगों ने पारंपरिक भोजन तैयार किया और देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना की. इस दौरान पूरा गांद्रपल्ली गांव किसी भूतिया बस्ती की तरह वीरान नजर आया.

अंधविश्वास या फिर कुछ और…

भले ही ग्रामीण अपनी आस्था और मान्यताओं के अनुसार शांति के उपाय कर रहे हों, लेकिन यह घटना आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि 28 मौतों का आंकड़ा छोटा नहीं है. गांव में तत्काल चिकित्सा शिविर लगाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जानी चाहिए. विशेषज्ञों को यह पता लगाना चाहिए कि क्या ये मौतें दूषित पानी, किसी छिपे हुए संक्रमण या स्थानीय भौगोलिक कारणों से हो रही हैं.

लोगों को अंधविश्वास से बाहर निकालकर उन्हें वैज्ञानिक उपचार के प्रति जागरूक करने की सख्त जरूरत है. फिलहाल, गांद्रपल्ली के लोग डर और उम्मीद के बीच झूल रहे हैं, इंतजार है कि कब उनका गांव फिर से सुरक्षित और खुशहाल होगा.

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