राजकोट। नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ अभियान से जुड़े करीब 3 करोड़ रुपये के बिलों पर गंभीर सवाल उठने के बाद स्टैंडिंग कमेटी ने उनका भुगतान रोक दिया है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
प्रारंभिक जांच में कई खर्चों को लेकर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। जांच अधिकारियों के अनुसार, रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत नगर निगम से 200 मिलीलीटर की एक मिनरल वॉटर बोतल के लिए 8 रुपये का भुगतान दर्शाया गया, जबकि बाजार में इसी श्रेणी की प्रीमियम बोतल थोक में 3 रुपये से कम और खुदरा बाजार में करीब 5 रुपये में उपलब्ध है।
अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के खर्चों सहित अन्य मदों में भी बिलों की दरें और भुगतान प्रक्रिया की गहन जांच की आवश्यकता है। इसी वजह से स्टैंडिंग कमेटी ने फिलहाल भुगतान पर रोक लगाते हुए पूरे मामले की एसआईटी से जांच कराने का फैसला किया है।
जांच दल संबंधित दस्तावेजों, बिलों, भुगतान रिकॉर्ड और रेट कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों की समीक्षा करेगा। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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