गुवाहाटी। असम में एक व्यक्ति 15 अलग-अलग दस्तावेज पेश करने के बावजूद अपनी भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर सका। ने के फैसले को बरकरार रखते हुए उसे विदेशी घोषित किया।
मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित व्यक्ति ने पैन कार्ड, वोटर आईडी, आधार से जुड़े दस्तावेज और अन्य प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पहचान संबंधी दस्तावेज भारतीय नागरिकता का अंतिम और पर्याप्त प्रमाण नहीं माने जा सकते।
कोर्ट ने कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों में सबसे महत्वपूर्ण यह साबित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति या उसके पूर्वज निर्धारित कानूनी कट-ऑफ तिथि से पहले भारत में वैध रूप से रह रहे थे। प्रस्तुत दस्तावेजों में आवश्यक कड़ियां (Link Documents) और पूर्वजों से संबंध स्थापित करने वाले विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिल सके।
इसी आधार पर हाई कोर्ट ने फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के निर्णय को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी। अदालत ने दोहराया कि पैन कार्ड, वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्र अपने आप में भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं हैं, यदि उनसे नागरिकता संबंधी कानूनी शर्तें पूरी तरह सिद्ध नहीं होतीं।
यह फैसला असम में नागरिकता से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की वैधानिक अहमियत और उन्हें साबित करने की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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