26 मासूम बच्चों की मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में आरोपित डॉक्टर को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी दूसरी जमानत याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पहली जमानत अर्जी निरस्त होने के बाद मामले में ऐसा कोई नया तथ्य या बदली हुई परिस्थिति सामने नहीं आई है, जिसके आधार पर आरोपी को राहत दी जा सके।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक मामले की परिस्थितियों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं होता, तब तक बार-बार जमानत मांगना न्यायिक प्रक्रिया का उचित आधार नहीं बन सकता। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत देने का कोई पर्याप्त कारण नहीं है।
यह मामला 26 मासूम बच्चों की मौत से जुड़ा होने के कारण प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियां पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी हैं और मामले की सुनवाई जारी है। पीड़ित परिवार लगातार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश स्पष्ट संदेश देता है कि लापरवाही या गंभीर आपराधिक आरोपों वाले मामलों में केवल तकनीकी आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत आरोपी के अधिकारों के साथ-साथ अपराध की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़ित पक्ष के हितों को भी समान महत्व देती है।
अब इस मामले में सभी की नजर ट्रायल कोर्ट में चल रही सुनवाई पर रहेगी, जहां साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अंतिम फैसला होगा।

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