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हेड कांस्टेबल और 'सुमता डॉन' का करोड़ों की ठगी का कथित खेल, कई नामों से खुला हाई-प्रोफाइल नेटवर्कA head constable and 'Sumta Don' allegedly scammed crores of rupees, exposing a high-profile network under multiple names.

 


नीमच/जोधपुर। मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा से जुड़े एक कथित हाई-प्रोफाइल ठगी मामले ने पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। आरोप है कि मध्यप्रदेश के नीमच जिले के मनासा थाने में पदस्थ हेड कांस्टेबल राघवेंद्र सिंह और जोधपुर की हिस्ट्रीशीटर सुनिता बिश्नोई उर्फ 'सुमता डॉन' ने मिलकर एक कारोबारी से करीब 2.45 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। इस मामले में राजस्थान के बोरानाड़ा थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।


कौन-कौन हैं मामले में नामजद?

पुलिस शिकायत और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में जिन प्रमुख लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें—

- हेड कांस्टेबल राघवेंद्र सिंह (मनासा थाना, नीमच)

- सुनिता बिश्नोई उर्फ 'सुमता डॉन' (हिस्ट्रीशीटर, जोधपुर)

- सुनिता के पुत्र मनीष और विनोद

- शिकायतकर्ता पर्वत सिंह राजपुरोहित (व्यवसायी)

- ईश्वर, हेमंत और प्रकाश (कथित सहयोगी)

- अर्जुन पाटीदार (जमानत दिलाने के नाम पर कथित लेन-देन से जुड़ा नाम)

इन सभी नामों का उल्लेख शिकायत और जांच के दस्तावेजों के आधार पर सामने आया है। आरोपों की जांच जारी है और सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।

ऐसे बिछाया गया कथित जा

शिकायत के अनुसार पहले कारोबारी को चित्तौड़गढ़ में मनचाहा एसपी नियुक्त कराने, प्रभावशाली अधिकारियों से संपर्क कराने और सांवरिया सेठ मंदिर में लड्डू प्रसादी का ठेका दिलाने का झांसा दिया गया। इसके बाद कथित तौर पर 1.05 करोड़ रुपये लिए गए। बाद में एक अन्य मामले में हाईकोर्ट से जमानत दिलाने का भरोसा देकर लगभग 1.40 करोड़ रुपये और लिए गए। इस तरह कुल रकम 2.45 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड जांच के दायरे में

शिकायतकर्ता ने पुलिस को व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। जांच एजेंसियां इन डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच में जुटी है।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अभी तक अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी तय होगी।

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