भारत में पुरुषों के बीच प्रोस्टेट कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ इस बीमारी का खतरा अधिक हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में प्रोस्टेट कैंसर अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होता है, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।
मेयो क्लिनिक और यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में, पेशाब करने में कठिनाई, पेशाब का कमजोर प्रवाह, यूरिन या स्पर्म में खून आना, स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिस्फंक्शन/नपुंसकता) और स्खलन के दौरान दर्द प्रोस्टेट कैंसर के संभावित संकेत हो सकते हैं।
यदि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने लगे, तो पीठ, कूल्हों या हड्डियों में लगातार दर्द, बिना कारण वजन घटना, अत्यधिक थकान और पैरों में कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, ये लक्षण अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं, इसलिए स्वयं निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष, या जिनके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास रहा हो, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर PSA (प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन) टेस्ट, डिजिटल रेक्टल एग्जाम (DRE), एमआरआई या बायोप्सी जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यदि पेशाब या स्पर्म में खून, लगातार पेशाब संबंधी परेशानी, हड्डियों में दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर पहचान और इलाज से प्रोस्टेट कैंसर का सफल उपचार संभव है।

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