नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी संसद में अपना संख्या बल और मजबूत करने की रणनीति पर लगातार काम कर रही है। पार्टी की कोशिश केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि सहयोगी दलों, क्षेत्रीय राजनीतिक समूहों और विपक्ष से अलग हुए नेताओं के जरिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ताकत बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में नए और छोटे दलों को साथ जोड़ने, क्षेत्रीय दलों के साथ रणनीतिक समझौते करने तथा मुद्दा-आधारित समर्थन हासिल करने की नीति अपनाई है। इसी रणनीति के तहत अब पूर्वोत्तर भारत की नौ सीटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां भाजपा और उसके सहयोगी दल अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा का लक्ष्य संसद के दोनों सदनों में अपना प्रभाव बढ़ाना और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए अधिक मजबूत संख्या बल सुनिश्चित करना है। इसके लिए पार्टी संगठनात्मक विस्तार, नए सहयोगियों को जोड़ने और राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में करने पर लगातार काम कर रही है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र को भाजपा लंबे समय से अपनी राजनीतिक विस्तार योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती रही है। ऐसे में आने वाले समय में इस क्षेत्र की राजनीति राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Post a Comment