आज के समय में बच्चों की सुरक्षा हर माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। बच्चे अक्सर घर के आसपास या पड़ोस में दोस्तों के साथ खेलने जाते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए केवल निगरानी ही काफी नहीं है। जरूरी है कि उन्हें कुछ ऐसे नियम भी सिखाए जाएं, जिनका पालन वे खुद कर सकें।
सबसे पहले बच्चे को यह समझाएं कि बिना बताए कहीं भी न जाए। खेलने के लिए जा रहा हो तो उसे बताना चाहिए कि वह कहां और किसके साथ रहेगा। दूसरा, किसी अजनबी व्यक्ति से बात करने, उसके साथ जाने या उससे कोई चीज लेने से मना करें, चाहे वह कितना भी परिचित क्यों न लगे।
तीसरा, बच्चे को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बारे में उसकी उम्र के अनुसार जानकारी दें ताकि वह किसी भी असहज स्थिति को पहचान सके। चौथा, उसे सिखाएं कि यदि कभी डर, खतरा या परेशानी महसूस हो तो तुरंत घर आए या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को बताए।
पांचवां, बच्चे को माता-पिता का मोबाइल नंबर और घर का पता याद करवाएं। आपात स्थिति में यह जानकारी बेहद काम आ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को डराने के बजाय जागरूक बनाना अधिक जरूरी है। सही जानकारी और खुला संवाद बच्चों को आत्मविश्वासी बनाता है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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