Top News

कमीशनखोरी की भेंट चढ़ा आउटसोर्स स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन, शहडोल में सात तो दमोह में पांच महीने से खाली हाथOutsourced Health Workers' Salaries Fall Prey to Commission Rackets: Empty-Handed for Seven Months in Shahdol and Five in Damoh

 

भोपाल। प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की रीढ़ कहे जाने वाले हजारों आउटसोर्स कर्मचारी इन दिनों गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नसीब नहीं हुआ है। इस बदहाली के बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी जिलों के सीएमएचओ और सिविल सर्जनों को अल्टीमेटम दिया है कि वे बुधवार सुबह 11 बजे तक वेतन भुगतान की प्रमाणित रिपोर्ट ई-मेल पर भेजें।


मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक अधिकारियों और निजी ठेका एजेंसियों की जुगलबंदी और कमीशनखोरी के कारण गरीबों का शोषण हो रहा है। हालत यह है कि कर्मचारियों के पास बच्चों की स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं बचे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो प्रदेश भर के कर्मचारी राजधानी में जुटकर उप-मुख्यमंत्री के बंगले का घेराव करेंगे और भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

शहडोल-दमोह में सबसे बुरा हाल

वेतन विसंगति का सबसे भयावह रूप आदिवासी अंचलों में दिख रहा है। शहडोल में पिछले सात माह से वेतन का इंतजार है। दमोह में भी बीते पांच माह से मानदेय नहीं मिला। बैतूल में चार माह से भुगतान अटका है। सागर में पिछले तीन माह से कर्मचारी खाली हाथ हैं। इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर व अनूपपुर में भी दो-दो माह से वेतन नहीं मिला है। मामला मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंचने के बाद एनएचएम मुख्यालय हरकत में आया है। वरिष्ठ संयुक्त संचालक ने सभी जिलों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि आउटसोर्स कर्मियों के पारिश्रमिक भुगतान की अद्यतन स्थिति तत्काल स्पष्ट की जाए।

Post a Comment

Previous Post Next Post