पीएमओ व सामान्य प्रशासन विभाग से जारी पत्र के बाद भी जांच नहीं
डेढ़ वर्ष से अधिक समय से सीएम हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं
व्यापम घोटाला, पटवारी भर्ती घोटाला और अब आबकारी आरक्षक भर्ती घोटाला हुआ है जिसने एक बार फिर प्रदेश की छवि को दागदार बनाया है. कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में बार-बार घोटाले की मुख्य वजह जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होना है. ईएसबी शिकायत के बाद भी जांच न कर अपने आपको बचाने में लगा रहता है.
*ऐसा ही एक मामला उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2023 का है जिसमें कई शिकायतों के बाद भी विषय विशेषज्ञ कमेटी का गठन नहीं कर ईएसबी ने पुरे मामले को दबा रखा है.*
यह था पूरा मामला-
उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2023 में फर्जीवाड़े के आरोप की लिखित शिकायत परीक्षार्थी कार्तिक गिरवाल एवं सुदर्शन सोलंकी ने कर्मचारी चयन मंडल भोपाल को की थी, जिसमें उक्त परीक्षा के बायोलॉजी विषय की दो शिफ्ट में समान प्रश्न होने के बावजूद एक शिफ्ट में प्रश्न को सही माना गया जबकि दूसरी शिफ्ट में प्रश्न को हिंदी अनुवाद में त्रुटि मानकर प्रश्न को निरस्त कर दिया गया. जिससे एक शिफ्ट को इस प्रश्न का लाभ हुआ एवं दूसरी शिफ्ट में एक प्रश्न की हानि हुई एवं कई परीक्षार्थी दशमलव में अंक आने से अपात्र हो गए. इस शिकायत पर ईएसबी ने जवाब दिया की उक्त के सम्बन्ध में ईएसबी स्तर से कार्रवाई अपेक्षित नहीं है.
*ईएसबी के इस जवाब से असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने इस पुरे मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति सचिवालय, राज्यपाल, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग एवं आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल को की किंतु अब तक ईएसबी द्वारा विषय विशेषज्ञ कमेटी का गठन कर जांच नहीं कराई गई. इतना ही नहीं ईएसबी ने प्रधानमंत्री कार्यालय व सामान्य प्रशासन से जारी पत्रों की अवहेलना की है* इसी संदर्भ में एक बार फिर इस पुरे मामले की शिकायत मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन विभाग एवं अध्यक्ष ईएसबी से 26-2-26 को की है.
पात्रता परीक्षा के बाद चयन परीक्षा हो चुकी है एवं नियुक्तियां भी दी जा चुकी है ऐसे में बड़ा सवाल है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी सामान्य प्रशासन विभाग ईएसबी पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है?
जबकि उच्च माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2024 में कोर्ट के आदेश पर विषय विशेषज्ञ कमेटी का गठन कर प्रश्नों के उत्तरों की पुनः जांच करने पर परिणाम में संशोधन हुआ व ईएसबी को दोबारा परिणाम जारी करना पड़ा.
बेरोजगार उम्मीदवारों के लिए एक प्रश्न पुरे भविष्य को तय कर सकता है वहीं शासन प्रशासन भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता हेतु प्रतिबद्धता नहीं दिखा पा रहे है.
ईएसबी द्वारा विषय विशेषज्ञ कमेटी का गठन न करना ही फर्जीवाड़े का पुख्ता सबूत है.
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