भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने लंबे अंतराल के बाद अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए बड़ा प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है। पार्टी के अनुसार, 1985 के बाद पहली बार इतने व्यापक स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने की कवायद की जा रही है। अभियान का फोकस केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यकर्ताओं को बूथ प्रबंधन, संगठन संचालन और संविधान से जुड़े विषयों की जानकारी दी जा रही है।
कांग्रेस के इस अभियान के तहत प्रदेश के 40 जिलों में प्रशिक्षण शिविर पूरे होने का दावा किया गया है। अब अक्टूबर से प्रशिक्षण को और नीचे तक ले जाने की तैयारी है। पार्टी की योजना बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने की है, ताकि चुनाव के समय संगठन की मशीनरी अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सके।
प्रशिक्षण में संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था, पार्टी की विचारधारा, मतदाता संपर्क और बूथ प्रबंधन जैसे विषयों पर जोर रहेगा। इसका सीधा मतलब है कि कांग्रेस अब केवल बड़े नेताओं के भरोसे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय बूथ पर अपने कार्यकर्ताओं की भूमिका मजबूत करना चाहती है।
लेकिन इस अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षण को जमीन पर लागू करना होगी। शिविरों में जुटी भीड़ और कागजी प्रशिक्षण से चुनाव नहीं जीते जाते। असली सवाल यह होगा कि अक्टूबर के बाद कितने कार्यकर्ता वास्तव में बूथ पर सक्रिय होते हैं और मतदाताओं तक संगठन की पहुंच कितनी बढ़ती है।
कांग्रेस का यह अभियान संगठन की वापसी की कोशिश है या चुनावी मजबूरी? इसका जवाब आने वाले महीनों में बूथ स्तर की सक्रियता देगी।

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