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2050 तक हर तीसरा भारतीय मोटापे की चपेट में? आज से बदलनी होगी जीवनशैली

 

भारत में बढ़ता मोटापा अब केवल वजन बढ़ने की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। 2022 के लैंसेट अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 4.4 करोड़ महिलाएं और 2.6 करोड़ पुरुष मोटापे से प्रभावित थे। विशेषज्ञों की चिंता है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो 2050 तक देश की लगभग एक-तिहाई आबादी मोटापे की समस्या से जूझ सकती है।



मोटापे का खतरा केवल शरीर के आकार तक सीमित नहीं है। अत्यधिक वजन से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।


इससे बचाव की शुरुआत रोजमर्रा की आदतों से की जा सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, भोजन में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करें तथा मीठे पेय, अत्यधिक तला-भुना और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन सीमित करें। पर्याप्त नींद और तनाव का बेहतर प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है।


सबसे जरूरी बात यह है कि वजन घटाने के लिए जल्दबाजी या अत्यधिक डाइटिंग के बजाय टिकाऊ आदतों पर ध्यान दिया जाए। लगातार वजन बढ़ रहा हो या मोटापे से जुड़ी कोई समस्या हो तो चिकित्सक या योग्य आहार विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।


मोटापे से बचाव किसी एक दिन की मुहिम नहीं, बल्कि रोज की छोटी-छोटी आदतों का परिणाम है।

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