भोपाल। मध्यप्रदेश में खेती के मैदान में महिलाओं की भूमिका अब सिर्फ मजदूरी या पारंपरिक कृषि कार्यों तक सीमित नहीं रह गई है। गांवों की महिलाएं अब ड्रोन तकनीक के जरिए खेतों में उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर आमदनी का नया जरिया बना रही हैं। इन्हें ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से पहचान मिल रही है।
ड्रोन के जरिए कम समय में बड़े क्षेत्र में छिड़काव होने से किसानों का समय और मेहनत दोनों बच रहे हैं। वहीं प्रशिक्षित महिलाओं को प्रत्येक सेवा के बदले आय मिल रही है। कई ड्रोन दीदियां इस काम से सालाना लाखों रुपये तक कमाई कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए कृषि तकनीक आधारित रोजगार का नया रास्ता खुला है।
मांग बढ़ने के बाद अब सरकार 700 से अधिक महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने की तैयारी में है। उद्देश्य केवल महिलाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित महिलाओं का एक मजबूत समूह तैयार करना है, जिसे ‘ड्रोन दीदी बटालियन’ के रूप में विकसित किया जा सके।
हालांकि असली परीक्षा प्रशिक्षण के बाद शुरू होगी। सवाल यह है कि क्या इन महिलाओं को लगातार काम, ड्रोन के रखरखाव की सुविधा, तकनीकी सहायता और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा? केवल प्रशिक्षण और मशीन देने से योजना सफल नहीं होगी।
यदि सरकार प्रशिक्षण के साथ बाजार और नियमित काम की व्यवस्था भी सुनिश्चित करती है, तो ड्रोन दीदियां मध्यप्रदेश के गांवों में महिला आत्मनिर्भरता और आधुनिक खेती की नई मिसाल बन सकती हैं।

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